पितृ पक्ष 2026 भारत, खाड़ी देशों, सिंगापुर, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में शनिवार 26 सितंबर से शनिवार 10 अक्टूबर तक है — और अमेरिका व कनाडा में शुक्रवार 25 सितंबर से शुक्रवार 9 अक्टूबर तक। नीचे दी गई हर तारीख की गणना हर शहर के लिए अलग से की गई है। लाहिड़ी अयनांश।
पितृ पक्ष — जिसे उत्तर भारत में श्राद्ध, श्राद्ध पक्ष या कनागत, और दक्षिण व पश्चिम भारत में महालय पक्ष कहते हैं — पूर्वजों का पखवाड़ा है। सोलह चंद्र-तिथियों तक परिवार अपने दिवंगत परिजनों को नाम लेकर याद करते हैं। वे जल, तिल और चावल अर्पित करते हैं। उनकी स्मृति में लोगों को भोजन कराते हैं। परंपरा मानती है कि इन दिनों पितर सबसे निकट होते हैं, और इस समय जो अर्पित किया जाए, वह उन तक पहुंचता है।
इस पेज पर पितृ पक्ष 2026 की पूरी जानकारी है: शुरू और समाप्त होने की तारीख और समय, हर तिथि के श्राद्ध की तारीख, श्राद्ध का समय, और घर पर श्राद्ध की विधि। इसमें भारत, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया — सबकी तारीखें हैं, क्योंकि विदेश में तारीखें हमेशा वही नहीं होतीं।
पितृ पक्ष 2026 कब से कब तक — शुरू और समाप्त होने की तारीख
| कहां | शुरुआत (पूर्णिमा श्राद्ध) | समापन (सर्वपितृ अमावस्या) |
|---|---|---|
| भारत, दुबई, सिंगापुर | शनिवार 26 सितंबर | शनिवार 10 अक्टूबर |
| ब्रिटेन | शनिवार 26 सितंबर | शनिवार 10 अक्टूबर |
| ऑस्ट्रेलिया (सिडनी) | शनिवार 26 सितंबर | शनिवार 10 अक्टूबर |
| अमेरिका और कनाडा | शुक्रवार 25 सितंबर | शुक्रवार 9 अक्टूबर |
शुरू और समाप्त होने का समय। पूर्णिमा तिथि शुक्रवार 25 सितंबर को 23:07 बजे (IST) शुरू होती है — यानी 17:37 UTC, और न्यूयॉर्क व टोरंटो में दोपहर 13:37। अमावस्या तिथि शनिवार 10 अक्टूबर को 21:20 बजे (IST) समाप्त होती है — यानी 15:50 UTC, और न्यूयॉर्क व टोरंटो में 11:50।
26 या 27 सितंबर? दोनों बातें सही हैं, पर अलग अर्थ में। पूर्णिमा का श्राद्ध शनिवार 26 सितंबर को है। असल पखवाड़ा — चंद्र मास का कृष्ण पक्ष — पूर्णिमा श्राद्ध के अगले दिन शुरू होता है: भारत, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में रविवार 27 सितंबर को, और उत्तरी अमेरिका में शनिवार 26 सितंबर को।
अमेरिका और कनाडा में एक दिन पहले क्यों? श्राद्ध दोपहर में किया जाता है, उस तिथि (चंद्र-दिन) पर जो उस समय चल रही हो। न्यूयॉर्क और टोरंटो में पूर्णिमा शुक्रवार को 13:37 पर शुरू हो जाती है — उसी दोपहर में। भारत में वही क्षण रात 23:07 बजे होता है, इसलिए भारत की पहली पूर्णिमा-दोपहर शनिवार को आती है। पखवाड़े के अंत में भी यही होता है: उत्तरी अमेरिका की दोपहर में अमावस्या शुक्रवार 9 अक्टूबर को चल रही होती है, और बाकी सब जगह शनिवार 10 अक्टूबर को।
इन सभी जगहों पर नवरात्रि रविवार 11 अक्टूबर से शुरू होती है।
श्राद्ध 2026 की तिथियां — हर तिथि, हर देश
श्राद्ध उस तिथि पर किया जाता है जिस तिथि को व्यक्ति का देहांत हुआ था, कैलेंडर की तारीख पर नहीं। यह तिथि हर साल अलग तारीख पर पड़ती है। पहले कॉलम में अपनी तिथि ढूंढें और उसी पंक्ति में अपने देश की तारीख देखें।
| श्राद्ध | भारत, दुबई | ब्रिटेन | अमेरिका-कनाडा — पूर्वी | अमेरिका-कनाडा — पैसिफ़िक | ऑस्ट्रेलिया |
|---|---|---|---|---|---|
| पूर्णिमा श्राद्ध | शनि 26 सित. | शनि 26 सित. | शुक्र 25 सित. | शुक्र 25 सित. | शनि 26 सित. |
| प्रतिपदा श्राद्ध | रवि 27 सित. | रवि 27 सित. | शनि 26 सित. | शनि 26 सित. | रवि 27 सित. |
| द्वितीया श्राद्ध | सोम 28 सित. | सोम 28 सित.* | रवि 27 सित. | रवि 27 सित. | सोम 28 सित. |
| तृतीया श्राद्ध | मंगल 29 सित. | सोम 28 सित.* | सोम 28 सित. | सोम 28 सित. | मंगल 29 सित. |
| चतुर्थी श्राद्ध | बुध 30 सित.* | मंगल 29 सित. | मंगल 29 सित. | मंगल 29 सित. | बुध 30 सित. |
| पंचमी श्राद्ध | बुध 30 सित.* | बुध 30 सित. | बुध 30 सित. | बुध 30 सित. | गुरु 1 अक्टू. |
| षष्ठी श्राद्ध | गुरु 1 अक्टू. | गुरु 1 अक्टू. | गुरु 1 अक्टू. | गुरु 1 अक्टू. | शुक्र 2 अक्टू.* |
| सप्तमी श्राद्ध | शुक्र 2 अक्टू. | शुक्र 2 अक्टू. | शुक्र 2 अक्टू. | शुक्र 2 अक्टू. | शुक्र 2 अक्टू.* |
| अष्टमी श्राद्ध | शनि 3 अक्टू. | शनि 3 अक्टू. | शनि 3 अक्टू. | शनि 3 अक्टू. | शनि 3 अक्टू. |
| नवमी श्राद्ध | रवि 4 अक्टू. | रवि 4 अक्टू. | रवि 4 अक्टू. | रवि 4 अक्टू.* | रवि 4 अक्टू. |
| दशमी श्राद्ध | सोम 5 अक्टू. | सोम 5 अक्टू. | सोम 5 अक्टू. | रवि 4 अक्टू.* | सोम 5 अक्टू. |
| एकादशी श्राद्ध | मंगल 6 अक्टू. | मंगल 6 अक्टू. | मंगल 6 अक्टू.* | सोम 5 अक्टू. | मंगल 6 अक्टू. |
| द्वादशी श्राद्ध | बुध 7 अक्टू. | बुध 7 अक्टू. | मंगल 6 अक्टू.* | मंगल 6 अक्टू. | बुध 7 अक्टू. |
| त्रयोदशी श्राद्ध | गुरु 8 अक्टू. | गुरु 8 अक्टू. | बुध 7 अक्टू. | बुध 7 अक्टू. | गुरु 8 अक्टू. |
| चतुर्दशी श्राद्ध | शुक्र 9 अक्टू. | शुक्र 9 अक्टू. | गुरु 8 अक्टू. | गुरु 8 अक्टू. | शुक्र 9 अक्टू. |
| अमावस्या — सर्वपितृ (अंतिम श्राद्ध) | शनि 10 अक्टू. | शनि 10 अक्टू. | शुक्र 9 अक्टू. | शुक्र 9 अक्टू. | शनि 10 अक्टू. |
* एक ही दिन दो श्राद्ध। ऐसा तब होता है जब कोई तिथि छोटी हो और दोपहर को केवल आंशिक रूप से छुए — तब वह उस दोपहर को अपनी पड़ोसी तिथि के साथ बांटती है।
दिल्ली, दुबई, सिंगापुर, लंदन, न्यूयॉर्क, टोरंटो, सैन फ़्रांसिस्को, वैंकूवर और सिडनी के लिए गणना — हर शहर की अपनी स्थानीय दोपहर के अनुसार। तीन बातें:
- सिंगापुर भारत वाले कॉलम को मानता है, सिवाय इसके कि वहां पंचमी गुरुवार 1 अक्टूबर को, षष्ठी के साथ, आती है।
- भारत के भीतर चतुर्थी और पंचमी लगभग हर जगह बुधवार 30 सितंबर को एक साथ पड़ती हैं। सुदूर उत्तर-पूर्व (गुवाहाटी) में पंचमी गुरुवार 1 अक्टूबर को चली जाती है।
- अगर आप इन शहरों से दूर रहते हैं — शिकागो, ह्यूस्टन, पर्थ, ऑकलैंड — तो तारांकित (*) दिन ही सबसे ज़्यादा बदल सकते हैं। उन्हें अपने पास के पुरोहित या मंदिर से पक्का कर लें।
इस साल भारत में पंचमी का श्राद्ध बुधवार 30 सितंबर को है, चतुर्थी वाले दिन ही। सप्तमी का श्राद्ध शुक्रवार 2 अक्टूबर को, अष्टमी शनिवार 3 अक्टूबर को, नवमी रविवार 4 अक्टूबर को और एकादशी मंगलवार 6 अक्टूबर को है। अंतिम श्राद्ध, सर्वपितृ अमावस्या, शनिवार 10 अक्टूबर को है।
श्राद्ध का दिन कैसे तय होता है
नियम पुराना है, और सटीक है। श्राद्ध अपराह्न में किया जाता है — यानी दोपहर बाद। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय (दिनमान) को पांच बराबर भागों में बांटा जाता है, और अपराह्न उनमें चौथा भाग है। किसी तिथि का श्राद्ध उस दिन होता है जिस दिन वह तिथि अपराह्न में चल रही हो।
कभी-कभी कोई तिथि किसी भी दिन अपराह्न को पूरा नहीं ढकती। तब श्राद्ध उस दिन किया जाता है जिस दिन वह अपराह्न का बड़ा हिस्सा ढकती है। इसी से दो श्राद्ध एक ही दिन पड़ जाते हैं, और इसी से लंदन का एक परिवार और दिल्ली का एक परिवार एक ही तिथि का श्राद्ध अलग-अलग तारीखों पर कर सकते हैं। नियम वही है — बस सूर्य अलग है।
श्राद्ध का समय — कुतुप, रौहिण और अपराह्न
श्राद्ध कर्म के लिए तीन समय बताए गए हैं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को पंद्रह बराबर मुहूर्तों में बांटा जाता है (इस मौसम में हर मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है):
- कुतुप मुहूर्त — आठवां मुहूर्त, जिसके ठीक बीच में स्थानीय मध्याह्न आता है। यह वही समय है जो अभिजित मुहूर्त का है।
- रौहिण मुहूर्त — नौवां, ठीक उसके बाद।
- अपराह्न — दसवें से बारहवें मुहूर्त तक, असली दोपहर। मुख्य अर्पण इसी समय किया जाता है।
दिल्ली, IST:
| तारीख | कुतुप | रौहिण | अपराह्न |
|---|---|---|---|
| 26 सित. | 11:48–12:36 | 12:36–13:24 | 13:24–15:48 |
| 27 सित. | 11:48–12:35 | 12:35–13:23 | 13:23–15:47 |
| 28 सित. | 11:47–12:35 | 12:35–13:23 | 13:23–15:46 |
| 29 सित. | 11:47–12:35 | 12:35–13:22 | 13:22–15:45 |
| 30 सित. | 11:47–12:34 | 12:34–13:22 | 13:22–15:44 |
| 1 अक्टू. | 11:46–12:34 | 12:34–13:21 | 13:21–15:44 |
| 2 अक्टू. | 11:46–12:34 | 12:34–13:21 | 13:21–15:43 |
| 3 अक्टू. | 11:46–12:33 | 12:33–13:20 | 13:20–15:42 |
| 4 अक्टू. | 11:46–12:33 | 12:33–13:20 | 13:20–15:41 |
| 5 अक्टू. | 11:45–12:32 | 12:32–13:19 | 13:19–15:40 |
| 6 अक्टू. | 11:45–12:32 | 12:32–13:19 | 13:19–15:39 |
| 7 अक्टू. | 11:45–12:32 | 12:32–13:18 | 13:18–15:39 |
| 8 अक्टू. | 11:45–12:31 | 12:31–13:18 | 13:18–15:38 |
| 9 अक्टू. | 11:45–12:31 | 12:31–13:18 | 13:18–15:37 |
| 10 अक्टू. | 11:44–12:31 | 12:31–13:17 | 13:17–15:36 |
भारत में दूसरी जगहों पर ये समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार कुछ मिनट से लेकर लगभग आधे घंटे तक आगे-पीछे होते हैं।
विदेश में — अपराह्न का समय, स्थानीय समय में:
| शहर | पखवाड़े की शुरुआत | पखवाड़े का अंत |
|---|---|---|
| दुबई | 13:22–15:46 | 13:15–15:35 |
| सिंगापुर | 14:08–16:33 | 14:04–16:28 |
| लंदन | 14:02–16:25 | 13:52–16:04 |
| न्यूयॉर्क | 13:59–16:23 | 13:51–16:07 |
| टोरंटो | 14:20–16:44 | 14:12–16:27 |
| सैन फ़्रांसिस्को | 14:12–16:36 | 14:05–16:22 |
| वैंकूवर | 14:15–16:38 | 14:05–16:19 |
| सिडनी | 13:00–15:26 | 13:58–16:30 |
सिडनी का समय एक घंटा आगे खिसकता है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में 4 अक्टूबर को घड़ियां आगे की जाती हैं। ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका में घड़ियां पखवाड़ा खत्म होने के बाद ही बदलती हैं।
विशेष महत्व के दिन — भरणी श्राद्ध, मातृ नवमी, सर्वपितृ अमावस्या
महा भरणी — मंगलवार 29 सितंबर, हर जगह। उस दोपहर ऊपर बताए हर शहर में चंद्रमा भरणी नक्षत्र में होता है। भरणी के देवता यमराज हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष में भरणी के दिन किया गया श्राद्ध गया में किए गए श्राद्ध के समान फल देता है।
मातृ नवमी (अविधवा नवमी) — रविवार 4 अक्टूबर। नवमी का श्राद्ध माताओं के लिए, और उन सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए किया जाता है जिनका देहांत पति के जीवित रहते हुआ। उत्तरी अमेरिका के पैसिफ़िक तट पर इस रविवार को दशमी का श्राद्ध भी साथ पड़ता है।
मघा — बुधवार 7 अक्टूबर; उत्तरी अमेरिका में मंगलवार 6 अक्टूबर। चंद्रमा मघा नक्षत्र से गुज़रता है — वह नक्षत्र जिसके देवता स्वयं पितर हैं। विशेषकर दक्षिण भारत में, इस पखवाड़े में मघा के दिन किया गया अर्पण महत्वपूर्ण माना जाता है।
घात चतुर्दशी — शुक्रवार 9 अक्टूबर; उत्तरी अमेरिका में गुरुवार 8 अक्टूबर। चतुर्दशी का श्राद्ध उनके लिए किया जाता है जिनका देहांत दुर्घटना, शस्त्र या हिंसा से हुआ — यानी जिनकी अकाल मृत्यु हुई। परंपरा उनके लिए उनकी अपनी तिथि के बजाय यह दिन अलग रखती है। जिनका स्वाभाविक देहांत चतुर्दशी को हुआ, उनका श्राद्ध अमावस्या को किया जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या — शनिवार 10 अक्टूबर; उत्तरी अमेरिका में शुक्रवार 9 अक्टूबर। अमावस्या का दिन सबके लिए है। अगर आपको किसी की देहांत-तिथि पता नहीं है, तो उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है। यह उन पूर्वजों का भी दिन है जिनके नाम अब याद नहीं रहे। बंगाल में यही महालया है — वह सुबह जो पितरों के पखवाड़े को देवी के पखवाड़े में बदल देती है।
घर पर श्राद्ध कैसे करें — और पितृ पक्ष में क्या न करें
श्राद्ध का मूल सरल है। इसे घर पर, विदेश में, और पास में पुरोहित न हों तो उनके बिना भी किया जा सकता है:
- दिन और समय चुनें। दिन ऊपर की तालिका से लें, और समय अपने शहर का अपराह्न।
- तर्पण करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करें — यह पितरों की दिशा है। काले तिल मिला जल अर्पित करें, हो सके तो कुशा के साथ, और जिन्हें याद कर रहे हैं उनमें से हर एक का नाम लें।
- हर अर्पण के साथ स्वधा कहें। यह शब्द पितरों के लिए है, जैसे देवताओं के लिए स्वाहा। बहुत से परिवार यह सरल रूप बोलते हैं: ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः — "पितरों को स्वधा, और नमन।" आपके कुल पुरोहित इसका लंबा रूप बोल सकते हैं।
- हो सके तो पिंड दान करें। पिंड दान यानी पके हुए चावल के पिंड पितरों को अर्पित करना।
- किसी को भोजन कराएं। उनकी स्मृति में ब्राह्मणों को, ज़रूरतमंदों को, या दोनों को भोजन कराएं। कौए, गाय और कुत्ते के लिए भी हिस्सा निकालें।
परंपरा से बड़ा बेटा श्राद्ध करता है। पर शास्त्र यह अधिकार केवल उसी तक सीमित नहीं रखते, और आज बहुत से परिवारों में पत्नी, बेटी या पोता भी श्राद्ध करते हैं। क्षेत्र और कुल के अनुसार रीति अलग होती है; अपने परिवार की रीति मानें। विदेश में ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बहुत से मंदिर पूरे पखवाड़े श्राद्ध कराते हैं, और तर्पण घर पर भी किया जा सकता है।
क्या न करें। इस पर व्यापक सहमति है: पितृ पक्ष नए काम शुरू करने का समय नहीं है। विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय और बड़ी खरीदारी नवरात्रि तक टाल दिए जाते हैं। बहुत से परिवार रसोई भी सादी रखते हैं: मांस नहीं, शराब नहीं, और अक्सर प्याज़-लहसुन भी नहीं।
इसका अर्थ यह नहीं कि यह पखवाड़ा अशुभ है। यह ध्यान और स्मरण का पखवाड़ा है। परंपरा का आशय यह है कि परिवार देवी से कुछ नया मांगने से पहले अपने पितरों का ऋण चुका दे।
पितृ पक्ष में आकाश
पूरे पखवाड़े सूर्य कन्या राशि में रहता है। उत्तर भारत में प्रचलित नाम यहीं से आया है: कनागत यानी कन्या-गत — सूर्य का कन्या में जाना। सूर्य 17 अक्टूबर को तुला में प्रवेश करता है, नवरात्रि शुरू होने के लगभग एक सप्ताह बाद।
पितृ पक्ष के दौरान आकाश में दो बातें होती हैं:
- बुध तुला में प्रवेश करता है — 26 सितंबर को 12:38 बजे IST (07:08 UTC)।
- शुक्र तुला में वक्री होता है — शनिवार 3 अक्टूबर को 12:43 बजे IST (07:13 UTC)। उस दिन अष्टमी है, और न्यूयॉर्क में उस समय 03:13 बजे होंगे। पश्चिमी (सायन) ज्योतिष शुक्र के इस ठहराव को वृश्चिक में बताता है; क्षण वही है। शुक्र वक्री 2026 (अंग्रेज़ी में)
मंगल कर्क में नीच का बना रहता है, और गुरु वहीं उच्च का। शनि मीन में वक्री है। राहु और केतु कुंभ और सिंह में हैं।
कुंडली में पितृ दोष
पितृ पक्ष में लोग पितृ दोष के बारे में भी पूछते हैं — जन्म कुंडली का वह दोष जिसे परंपरा पितरों के ऋण के रूप में देखती है। शास्त्रीय रूप से इसे नवम भाव में देखा जाता है — पिता और वंश का भाव — और सूर्य में, जो पिता का ग्रह है, जब राहु, केतु या शनि इन्हें पीड़ित करते हों।
कुंडली की कोई स्थिति शाप नहीं होती, और उसे किसी एक ग्रह-स्थिति से नहीं पढ़ा जाता। इसीलिए Astro River के पठन-क्रम में लग्न के ठीक बाद, तीसरे क्रम पर, चंद्रमा, शनि और केतु पढ़े जाते हैं: ये मिलकर दिखाते हैं कि जीवन कौन-सा संघर्ष उठाए चल रहा है — और उस संघर्ष का कुछ हिस्सा विरासत में मिला होता है। पितृ दोष पर पूरा लेख — इसे कैसे देखा जाता है, कैसे नहीं, और परंपरा क्या उपाय बताती है — जल्द ही आएगा।
अगर इस पखवाड़े आप स्वयं श्राद्ध नहीं कर पा रहे — पास में पुरोहित नहीं, या परिवार अलग-अलग देशों में बसा है — तो संस्थान आपकी ओर से, आपके परिवार के नाम से, तर्पण, श्राद्ध और पितृ दोष पूजा की व्यवस्था करता है।
→ इस पितृ पक्ष श्राद्ध या पूजा की व्यवस्था करें
संस्थान कैसे प्रकाशित करता है
तीन स्तर हैं, और इनका उपयोग इसी क्रम में करना है।
पेज निःशुल्क हैं, और निःशुल्क रहेंगे। यह पद्धति सामान्य रूप से जो कुछ कह सकती है — नक्षत्र, भाव, दशाएं, इस साल का आकाश — वह सब खुले में प्रकाशित है, और कहीं से दोहराया नहीं गया, गणना करके लिखा गया है। ज़्यादातर लोगों को इससे आगे कुछ नहीं चाहिए।
लिखित रिपोर्ट कुंडली के एक क्षेत्र को पूरी गहराई से देखती है। रिपोर्ट — संस्थान के अपने शब्द में, Inscription — अपनी गति से पढ़ी जाती है और संभालकर रखी जाती है।
निजी परामर्श पूरी कुंडली को एक साथ, सीधे बातचीत में पढ़ता है। लग्न, चंद्रमा, उप-स्वामी, दशा और इस समय के गोचर — और प्रश्न आपके, हमारे नहीं। जो परख कोई पेज या रिपोर्ट नहीं दे सकती, वह वहीं होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पितृ पक्ष क्या है? पूर्वजों का पखवाड़ा: पूर्णिमा से अमावस्या तक सोलह चंद्र-तिथियां, जिनमें परिवार अपने दिवंगत परिजनों को जल, भोजन और प्रार्थना अर्पित करते हैं। इसे श्राद्ध, कनागत और महालय पक्ष भी कहते हैं।
पितृ पक्ष 2026 कब से कब तक है? कनागत कब से हैं? भारत, खाड़ी देशों, सिंगापुर, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में शनिवार 26 सितंबर से शनिवार 10 अक्टूबर तक। अमेरिका और कनाडा में शुक्रवार 25 सितंबर से शुक्रवार 9 अक्टूबर तक। पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर को 23:07 बजे IST शुरू होती है, और अमावस्या तिथि 10 अक्टूबर को 21:20 बजे IST समाप्त होती है।
पितृ पक्ष 26 सितंबर से है या 27 सितंबर से? शनिवार 26 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध है। असल पखवाड़ा — कृष्ण पक्ष — रविवार 27 सितंबर से शुरू होता है, और प्रतिपदा का श्राद्ध उसी दिन है। अमेरिका और कनाडा में दोनों एक दिन पहले हैं: पूर्णिमा का श्राद्ध शुक्रवार 25 सितंबर को, और पखवाड़ा शनिवार 26 सितंबर से।
पहला श्राद्ध कब है? भारत में पूर्णिमा का श्राद्ध शनिवार 26 सितंबर को है, और प्रतिपदा का रविवार 27 सितंबर को। अमेरिका और कनाडा में दोनों एक-एक दिन पहले हैं: शुक्रवार 25 सितंबर और शनिवार 26 सितंबर।
अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में पितृ पक्ष कब है? अमेरिका और कनाडा: शुक्रवार 25 सितंबर से शुक्रवार 9 अक्टूबर। ब्रिटेन: शनिवार 26 सितंबर से शनिवार 10 अक्टूबर, भारत के समान। उत्तरी अमेरिका में यह एक दिन पहले है, क्योंकि वहां शुक्रवार दोपहर को ही पूर्णिमा तिथि चल रही होती है।
पंचमी का श्राद्ध 2026 में कब है? भारत, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका में बुधवार 30 सितंबर को — भारत में यह चतुर्थी के साथ उसी दिन है। ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर में गुरुवार 1 अक्टूबर को।
भरणी श्राद्ध 2026 कब है? मंगलवार 29 सितंबर को, हर जगह — उस दोपहर ऊपर बताए हर शहर में चंद्रमा भरणी नक्षत्र में होता है। इसे महा भरणी भी कहते हैं।
आखिरी श्राद्ध — सर्वपितृ अमावस्या 2026 — कब है? सर्वपितृ अमावस्या: शनिवार 10 अक्टूबर, या अमेरिका और कनाडा में शुक्रवार 9 अक्टूबर।
क्या श्राद्ध की तारीख वही होती है जिस तारीख को देहांत हुआ था? नहीं। श्राद्ध देहांत की तिथि — यानी चंद्र-दिन — पर होता है, जो हर साल अलग कैलेंडर तारीख पर पड़ती है। ऊपर की तालिका में अपनी तिथि देखें।
अगर तिथि पता न हो तो? श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या को करें: शनिवार 10 अक्टूबर, या उत्तरी अमेरिका में शुक्रवार 9 अक्टूबर। यह दिन इसी के लिए है।
पितृ पक्ष का मंत्र क्या है? अर्पण का शब्द स्वधा है। तर्पण के साथ बहुत से परिवार यह सरल रूप बोलते हैं: ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः। पुरोहित इसके लंबे रूप बोलते हैं, जिनमें पिता, दादा और परदादा का नाम क्रम से लिया जाता है।
पितृ पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए? नए काम शुरू न करें: विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय और बड़ी खरीदारी नवरात्रि तक टाल दिए जाते हैं, जो रविवार 11 अक्टूबर से शुरू होती है। बहुत से परिवार पूरे पखवाड़े मांस, शराब, प्याज़ और लहसुन से भी परहेज़ करते हैं।
क्या भारत के बाहर श्राद्ध किया जा सकता है? हां। अपना स्थानीय अपराह्न और अपने देश का कॉलम देखें। विदेश में बहुत से मंदिर श्राद्ध कराते हैं, और तर्पण घर पर जल, काले तिल और सच्चे संकल्प के साथ किया जा सकता है। संस्थान आपकी ओर से श्राद्ध की व्यवस्था भी कर सकता है।
क्या महिलाएं श्राद्ध कर सकती हैं? परंपराएं अलग-अलग हैं। शास्त्र पहले पुत्र का नाम लेते हैं, पर पुत्र न हो तो दूसरों को भी अनुमति देते हैं, और आज बहुत से परिवार और पुरोहित पत्नी या बेटी द्वारा श्राद्ध किया जाना स्वीकार करते हैं। अपने परिवार की रीति मानें, या अपने पुरोहित से पूछें।
कुतुप मुहूर्त क्या है? दिन के पंद्रह भागों में से आठवां, जिसके ठीक बीच में स्थानीय मध्याह्न आता है — दिल्ली में 26 सितंबर को 11:48 से 12:36 बजे (IST) तक। यह वही समय है जो अभिजित मुहूर्त का है।
यह पेज जानकारी देता है। तारीखों की गणना स्विस एफ़ेमेरिस (लाहिड़ी) से, बताए गए शहरों के लिए की गई है। अगर आपका परिवार या मंदिर अपना पंचांग मानता है, तो उसी का पालन करें।
अपनी कुंडली से जुड़े प्रश्न के लिए — नवम भाव, सूर्य, या कोई दशा (ग्रह-काल) जो ज़रूरत से ज़्यादा भारी लग रही हो — निजी परामर्श में उसे पूरा पढ़ा जाता है।
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